शनिवार, 24 मार्च 2012

गृह मंत्री उमाशंकर गुप्ता के नाम खुला खत

एक शुभचिंतक का-
गृह मंत्री उमाशंकर गुप्ता के नाम खुला खत

(अ)    श्रद्धेय
        आपने जिस समय म.प्र. के गृहमंत्री के रूप में पद एवं गोपनियता की शपथ ली थी, उस दिन प्रदेश के आवाम को यह भरोषा हो गया था कि आर.एस.एस. पोषित स्वयंसेवक व भाजपा के निष्ठावान कार्यकर्ता के हांथों में प्रदेश की कानून व्यवस्था चुस्त व दुरूस्त रहेगी। ऐसा प्रदेश के मुखिया व संगठन के पदाधिकारियों ने भी सोचा होगा। तभी तो इतने महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी आपको सौंपी गई है। लेकिन ऐसा हो न सका।
        प्रदेश में कानून व्यवस्थ चरमरा गई है। आए दिन दबंग, गुण्डे महिलाओं के गलों से उनके मंगलसूत्र तोड़ रहे हैं। नावालिग लड़कियों के साथ गैंगरेप की घटनाएं पूरे प्रदेश को कलंकित कर रहीं हैं। खनिज माफियाओं के गुण्डागर्दी आए दिन अखवारों के सुर्खियां बन रहीं हैं। लूट डकैती, बलात्कार और गरीबों पर दबंगो के अत्याचारों से प्रदेश की जनता त्राहि-त्राहि कर रही है।
        गृहमंत्री महोदय आपके समय की सबसे कलंकित घटना आई.पी. एस. अधिकारी नरेन्द्र कुमार की खनिज माफियाओं की सांठ-गांठ से उनका कत्ल कर देने से हुई है। जिसने संपूर्ण प्रदेश को झकझोरकर रखदिया है। आने वाले दिनों में छात्रों से परीक्षा में जब यह प्रश्न पूछा जाएगा कि प्रदेश के उस गृहमंत्री का नाम बताईए जिसके कार्यकाल में एक आईपीएस अधिकारी का कत्ल हुआ हो। बन्धु आप जानते हैं कि छात्रों का जवाब होगा उमाशंकर गुप्ता।
        विधानसभा प्रजातंत्र का वह मन्दिर है जहां कानून बनते हैं। प्रदेश की प्रगति के लिए योजनाएं बनाईं जाती हैं, जनता के दु:ख दर्द की दास्तानें जनप्रतिनिधियों के माध्यम से सदन के पटल पर रखकर सरकार से पूछते हैं कि जनता की बुनियादी समस्याओं को दूर करने के लिए सरकार क्या-क्या कदम उठा रही है। विधानसभा में गृह मंत्रालय संबंधी चर्चा हो रही थी, तब भिण्ड के ऊर्जावान, निडर व स्वाभिमानी जनप्रतिनिधि चौधरी राकेश सिंह ने भिण्ड जिले की बिगड़ती कानून व्यवस्था पर कई प्रश्न पूछ डाले, व चर्चा के दौरान उनके द्वारा इस बात का खुलासा किए जाने पर कि गृहमंत्री उमाशंकर गुप्ता भिण्ड में आयोजित वैश्य सम्मेलन को जब व्यौपार मण्डल की धर्मशाला में संबोधित कर रहे थे, तब उन्होंने कहा था कि "प्रदेश के संपूर्ण वैश्य एकजुट हो जाएं तो म.प्र. का मुख्यमंत्री वैश्य बन सकता है" यह सुनने पर गृह मंत्री अपना आपा खो बैठे, अससंदीय घोर आपत्तिजनक व सडक़ पर चलने वाले गमारों की भाषा में बोलने पर भिण्ड मुरैना की तासीर के अनुरूप विधायक जब उनकी असंसदीय भाषा का जवाब देने के लिए आगे बढ़े तब उनके साथियों ने उन्हें रोक लिया, और उनके आग्रह पर वह शान्त हो गए।
        गुप्ता साहब आपने भाजपा के उस मूल मंत्र पर कालिख पोत दी है जिसमें भाजपा के चरित्र, चेहरा व चाल को दूसरी पार्टियों से अलग होने की बात कही जाती है। आपने आर.एस.एस. के हिन्दुत्व के सिद्धांतों का घोर अपमान किया है। आपने अपनी ओछी हरकत से विधानसभा के साथ-साथ पूरे प्रदेश को शर्मशार कर दिया है। आपने विधानसभा के गौरव शाली इतिहास को कलंकित कर दिया है। गुप्ता साहब बेहतर होगा कि आप इस दायित्व से मुक्ति पा लें तो जहां भाजपा की शाख बचती रहेगी वहीं आपकी वृद्धावस्था को राहत मिलेगी। आपके भरोसे पर तो प्रदेश की जनता को रोजमर्रा की विगड़ती कानून व्यवस्था के लिए रोना ही पड़ेगा।
        गुप्ता साहब! आपने प्रदेश की सरकार के खिलाफ मुर्दावाद के नारे लगवा दिए, आप अपने पुतलों को चौराहों पर जलवाने लगे, आपकी विरोधी पार्टियां क्या चुप बैठ जाएंगी "इस शर्मनांक घटना पर"।
        इस शुभचिंतक की नेक सलाह है कि आप अपनी ऐसी ओछी हरकतों से जनता की निगाहों में न गिरें। आमीन। जय जय श्रीराम

आपका शुभचिंतक
जगत नारायण